14 सितंबर 2026, समय 16:24 बजे — थाईलैंड के चुनाव आयोग (EC) ने सीनेट सदस्यों के चुनाव से जुड़े मामले में निर्णय दिया है। आयोग ने 77 संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का फैसला किया, जबकि कई अन्य शिकायतों में, जिनमें कुछ राजनीतिक नेताओं और राजनीतिक दलों के कार्यकारी सदस्यों से जुड़े आरोप भी शामिल हैं, आगे मुकदमा न चलाने का निर्णय लिया गया।
यह फैसला नई कानूनी लड़ाई की शुरुआत कर सकता है। आयोग की प्रक्रिया या निर्णय से असहमत पक्ष, कानूनी आधार और संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट, भ्रष्टाचार एवं दुराचार मामलों की आपराधिक अदालत, या प्रशासनिक अदालत में कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं।
एक महत्वपूर्ण मुद्दा सीनेट चयन स्थल के भीतर कथित रूप से “सूचियां” या “नोट” ले जाने से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में संबंधित कानूनों और प्रशासनिक अदालत के आदेशों का उल्लेख किया है, जिससे यह बहस फिर तेज हुई है कि किन परिस्थितियों में ऐसे दस्तावेज अंदर ले जाना कानून का उल्लंघन माना जा सकता है।
दूसरा प्रमुख मुद्दा गवाहों के बयानों से जुड़ा है। पहले ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि कुछ गवाहों ने अपने पुराने बयान बदले या वापस लेने का अनुरोध किया। इससे गवाहियों की विश्वसनीयता, उनके साक्ष्य मूल्य और आयोग द्वारा अन्य सबूतों के साथ उनके मूल्यांकन पर सवाल उठे हैं।
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कई राजनीतिक समूहों और कार्यकर्ताओं ने संकेत दिया है कि वे आयोग के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई या अतिरिक्त जांच की मांग कर सकते हैं। इसलिए सीनेट चुनाव में कथित मिलीभगत का मामला अभी समाप्त होता नहीं दिख रहा, बल्कि यह न्यायिक समीक्षा के एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है।
थाईलैंड के इतिहास में चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का उदाहरण पहले भी रहा है। वर्ष 2006 में पुलिस जनरल वासाना पर्मलार्प के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग के सदस्यों को चुनाव से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया गया था। हालांकि मौजूदा मामले का निर्णय इसके अपने तथ्यों, साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर ही किया जाना चाहिए; पुराने मामले के परिणाम को सीधे इस मामले पर लागू नहीं किया जा सकता।
Vihok News
स्रोत: थाई चुनाव आयोग के बयान / 2024 सीनेट चुनाव मामले से संबंधित जानकारी
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